IAS and education

योग्यता मेरी जुती। लेखक  प्रो.डॉ. रामनाथ  पूर्व कुलपति
                             लार्ड लिनलिथगो ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर 500 पोस्ट ग्रेजुएट के बराबर हैं तो बाबासाहब अम्बेडकर ने अंग्रेजों से कहा था कि आप देश को खाली कर दे हम अखंड भारत चला लेंगे। अखंड भारत मैं हिंदूराष्ट्र नहीं बनता जो आज बना हुआ है, ब्रिटिश प्रधानमंत्री तो गांधी एन्ड कंपनी को " तुम्हारा दिमाग तो ठीक" जैसे शब्द इस्तेमाल करते थे।
      भारत बांग्लादेश व पाकिस्तान के अलावा दुनिया के किसी देश की शिक्षा व्यवस्था में तृतीय श्रेणी नही होती।  सवर्णों की अयोग्यता के कारण भारत में तृतीय श्रेणी का जन्म हुआ।
                           सन 1856 मैं मद्रास मेडिकल कालेज व अन्य कालेजो में इंटरमीडिएट परीक्षा मैं सारे छात्र फेल हो गए। उस समय न्यूनतम 40% पास मार्कस थे। यह भी उल्लेखनीय है कि उस समय एक भी sc st छात्र को पढ़ने नहीं दिया जाता था। सवर्ण अभिभावकों ने अंग्रेजों के हाथ जोड़े की यदि मेरिट गिराकर 33% अंक की तृतीय श्रेणी सृजित कर दी जाए तो हमारे अयोग्य छात्र भी पास हो सकते हैं।
                                    इसी तरह 1901 की कलकत्ता बोर्ड की मेट्रिक परीक्षा में यदि पास होने के लिए 40% अंक  से घटाकर 33%  अंक न कर दिए जाते तो1400 सवर्ण छात्र फेल हो जाते। सन 1922-27 की mbbs और इंजीनियरिंग परीक्षा में सवर्ण छात्रो का फेल प्रतिशत क्रमशः 47 व 34 था। आज sc का फेल प्रतिशत एक या दो भी होता है तो मीडिया लिखता है; जब sc छात्र फेल हो जाते हैं तो वे प्रवेश क्यों लेते है। 
        आज़ादी के बाद कितने नोबेल पुरस्कार मिले??? वैज्ञानिक सोच ही वैज्ञानिक विकास कराती है। आज हिंदू भारत मे अवैग्यानिक सोच दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है।
                          हम हिंसा व मानवाधिकार में अव्वल हैं हम बेईमानी, घोटालेबाजी ओर देश की सारी संपत्ति मंदिरों की तिजोरियों भरने में अव्वल है। स्वदेशी आतंकवाद में हम प्रथम हैं। हम किसी भी क्षेत्र मैं द्वितीय तृतीय श्रेणी नही है।
                           कलर्क की नौकरी पर सड़ रहे पंडित रामानुज के अंदर के गणितग्य को अंग्रेजों ने पहचान कर उन्हें लंदन भेजा, जिससे वह दुनिया का महान गणितज्ञ बना। नही तो वे बड़े बाबू के पद पर रिटायर हो जाते।
                          दारा सिंह दिल्ली की जेल मैं विचाराधीन कैदी बनकर सड़ रहा था। जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने दारासिंह में विश्वविख्यात पहलवान के गुणों को पहचान कर उसे जेल से मुक्ति दिलाई। सरकारी सुविधा मिलने पर दारासिंह विश्व केसरी बने।
                       पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी. जे. गुप्ता को अपनी जूठी व चोरी की खोज पर दुनिया के वैज्ञानिकों के सामने माफी मांगनी पड़ी।
                                   IAS कि परीक्षा में योग्यता।......... संघ लोक सेवा आयोग द्वारा सन 1950 मैं आयोजित स्वतंत्र भारत की प्रथम IAS परीक्षा  में बंगाल के अच्युतानन्द दास sc प्रथम व्यक्ति थे जो IAS के लिए सफल घोषित हुए। इस परीक्षा मैं मद्रास के एन. कृष्णनको 260 , ए. गुप्ता को 265 ए. दास को मात्र 110 अंक मीले। लिखित परीक्षा को टाप करने वाले ए. दास को मौखिक परीक्षा में सभी IAS व आईएएस एलाइड परीक्षा मै सफल अभ्यर्थियों से कम नम्बर दिए गए।
                                      सामान्य ज्ञान नामक 100 नंबर की लिखित परीक्षा में एन. कृष्णन को 69, ए. गुप्ता को 40 तथा ए. दास को 79 अंक मिले। मतलब ए. दास को अधिक अंक मिले। लिखित परीक्षा मैं ए. दास को ए. गुप्ता से 119 अंक अधिक मीले तथा मौखिक में गुप्ता जी को दास से 155 अंक अधिक मिले। यदि मौखिक में 10 अंक भी कम देते तो भी वो टॉप करते लेकिन मौखिक में कम अंक मिलने पर उन्हें अंतिम स्थान मेरिट में मिला जब कि गुप्ता जी 22 वे स्थान पर रहे।
        एक ओर उदाहरण है। 1954 कि आईएएस परीक्षा के प्रत्याशी आसाम के एस. जे. चोग st का है। चोग को लिखित परीक्षा में 747 तथा रविंद्र नाथ सेनगुप्ता को 694अंक मिले। G K की लिखित परीक्षा मैं चोग  को 114 तथा सेनगुप्ता को 50अंक मिले। पर्सनालिटी टेस्ट में चोंग को 160 तथा गुप्ता जी को 240 अंक मिले।  इस प्रकार उन्हें भी ए. दास की तरह अंतिम स्थान पर फेंक दिया गया।
kusum dabhi ji
Veeru Ji की वाल से कापी

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