हरिजन शब्द कहने पर अब होगी जेल ,सुप्रीम कोर्ट ने भी हरिजन शब्द को अपराधिक माना केंद्र व केरल राज्य की सरकार भी अलग अलग अध्यादेश द्वारा लगा चुकी है हरिजन शब्द के प्रयोग पर रोक हरिजन शब्द के प्रयोग पर संशोधित अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम व भारतीय दंड संहिता की धाराओं में दर्ज हो सकता है केस व जाना पड़ सकता है जेल हरिजन शब्द का प्रयोग करने वाले लोगों व सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कराएंगे आपराधिक केस दर्ज -: रजत कल्सन हिसार/26 अक्टूबर महात्मा गांधी द्वारा भारत के अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय के लोगों के लिए उपयोग किए गए शब्द हरिजन का प्रयोग करना अब महंगा पड़ सकता है ।नेशनल एलाइंस फॉर दलित हुमन राइट्स के संयोजक व दलित राइटस एक्टिविस्ट ,अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि महात्मा गांधी द्वारा देश के अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लिए इज़ाद किए गए शब्द हरिजन का शुरू से ही विरोध रहा है उन्होंने कहा कि भारत का अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय शुरू से ही इस शब्द को अपने लिए अपमानजनक मानता आ रहा है तथा इस पर रोक लगाने के लिए आजादी के बाद स...
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Showing posts from October, 2018
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बहुजन समाज की सच्चाई हिन्दू देवी देवताओं का घर में , घरवाली सत्कार करे । पति मंच पर बाबा साहब ओर गौतम का प्रचार करे ॥ घर वाली नित पूजा करती, माखन चोर कन्हैया की । वृत रखे और करे आरती काली और संतोषी मैया की । एक ना माने सैंया कि हिन्दुओं के सब त्यौहार करे ॥ .......... पति देव जाते संसद पर , भीम पर फूल चढ़ाने को । पत्नि जाति नगर कोट गुणगाँव जात लगाने को । नही मानती समझाने से , पति संग तकरार करे ॥ ........... देवी देव अवतार ईश्वर, पति पाखंड बताता । घर में लग रही सबकी फोटो , उन्हे उतार ना पाता । पत्नि से वह घबराता कहीं तुझको ही घर से ना बाहर करे ॥ ...... भंते को ना बुलवाता , घरवाली का डर भारी । पाखंडी साधु फकीर खाय जा दक्षिणा देता है न्यारी । पोथी पत्रा बिना पुजारी घर में संस्कार करे ॥ ........ मंच पे देता लंबे भाषण, बाबा भीम के गुण गांवे । बौद्ध धम्म के बिना देश में शोषित इज्जत ना पावे । औरों को उपदेश सुनावै, अपने घर में ना सुधार करे ॥ ........ मंच बाबा का अनुयायी, बौद्ध धम्म का ज्ञाता है । दफ्तर में गांधी का चेला , वहां हरिजन बन जाता है । "प्रेमी" को समझाता...
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🙏🏿🌷 क्या महर्षि वाल्मीकि भंगी थे ❓⏩:- दोस्तों, बडे आश्चर्य की बात है कि वृहद दलित समाज के कुछेक भ्रमित लोग अपने आपको वाल्मीकि के वंशज बताते हैं और बाबा साहब की देन को डकार कर अपने विकास का श्रेय वाल्मीकि को देते हैं। कृपया इस पोस्ट को ध्यान से पूरा पढकर अपनी टिप्पणी अवश्य देने के साथ साथ जागरूकता के लिए इसे अधिकतम शेयर करने का कष्ट करें। (1). त्रेता युग में शुद्रो को शिक्षा ग्रहण और तपस्या करने का अधिकार नही था लेकिन वाल्मीकिजी तो महान तपस्वी और ब्राह्मणी भाषा "संस्कृत " के प्रकांड विद्वान थे। अगर वाल्मीकिजी शूद्र होते तो न तो उन्हें संस्कृत आती और न ही उन्हे तपस्या करने दी जाती। (2). वाल्मीकि रामायण मे स्वयं वाल्मीकि जी ने श्लोक संख्या 7/93/16, 7/96/18 और 7/111/11 में लिखा है कि वे ब्रह्मा के पुत्र "प्रचेता" के दसवें पुत्र हैं। अर्थात वाल्मीकि जी ब्राह्मण ब्रह्मा के पौत्र थे। {" प्रेचेतसोंह दशमा: पुत्रों रघवनंदन। मनसा कर्मणा वाचा, भूतपूर्व न किल्विषम्"}। और प्रचेता जिन्हें वरुण भी कहते हैं ब्रह्मा के पुत्र थे। वाल्मीकि की माता का नाम ...
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*शुद्रों को हराने के लिए अलग अलग व्यक्तियों की क्या राय रही...जरुर पढ़े।* (1) *देवकी नन्दन ठाकूर:-* ✍ शुद्रों को दोस्ती करके हराया जा सकता है लेकिन लड़कर नही। (2) *मोहन भागवत:-* ✍ जंग मे उतर जाने के बाद शुद्रों को रोकना ,शेर के मुँह में हाथ देने जैसा है। (3) *संभाजी भिड़े:-* ✍ अगर शुद्रों से जितना है तो उन्हे आपस में लड़ा दो। *RSS की किताबें बंच ऑफ थाट्स बोल रही है* 👉 *शुद्रों के घरों के पास में शराब की दुकाने खोल दो ताकी ये नशे में होकर आपस में लड़कर मर जाएं।* 👉 *शुद्रों के मोहल्ले में मन्दिर बनवा दो ताकि ये पाखण्डवाद के दलदल मे फस जाएं।* *इसलिए इन बातों को ध्यान में रखते हुए आपस में न झगड़े और सभी शुद्र समाज सदैव आपस में एकता बनाएं रखें। "एक बनों" "नेक बनों" जय भीम जय भारत
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✌☝☝-: तीन बाते :- बाबा साहब ने कहा था कि, " ऐ मेरे पढे लिखे लोगों जो कारवाँ तुम आज यहाँ देख रहे हो इसे मैं बडी त्याग, तपस्या, बलिदान के साथ यहाँ तक लाया हूँ।" मैनें अपने चार बेटे खोये। मैनें अपनी पत्नी खोयी। मैनें अपना भाई परिवार खोया मैनें अपना घर खोया। मैनें अपने दोस्त रिस्तेदार खोये। मैनें अपनी भूख, प्यास,स्वास्थ भी खोया। मैनें अपनी नींद,ऐशो-आराम खोया। मैनें अपने आप को खोया तब जाकर ऐ कारवाँ हासिल किया है मैं अपने पढे लिखे लोगों से बस तीन बाते कहना चाहता हूँ ? ☝पहली बात :-- " अगर तुम इस कारवाँ को आगे बढा सको तो बढ़ाना, अगर नहीं बढा पाये तो किसी भी हाल में पिछे मत जाने देना।" ☝दूसरी बात :-- " ऐ मेरे पढे लिखे लोगों जब पढ लिख लेना, कुछ बन जाना तो कुछ बुध्दि , पैसा, ज्ञान, हुनर, समय इस समाज को दे देना जिस समाज से तुम आये हो।" ☝तीसरी बात :-- " यदि तुम इस जाति व्यवस्था, पुरानी रीतियों,रुढियों परम्पराओं तथा अंधविश्वास को खत्म न कर पाओ, तो अपनी जाति को और अपने आप को इतना महान बनाना की सभी जाति तुम्हारी जाति से नीचे हो ज...
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विजय दशमी का सही नाम "अशोक विजयदशमी" है। Vijay Dashami सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध में विजयी होने के दसवें दिन तक मनाये जाने के कारण इसे अशोक विजयदशमी कहते हैं। इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। विजय दशमी बौद्धों का पवित्र त्यौहार है। ऐतिहासिक सत्यता है कि महाराजा अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्याग कर बौद्ध धम्म अपनाने की घोषणा कर दी थी। बौद्ध बन जाने पर वह बौद्ध स्थलों की यात्राओं पर गए। तथागत गौतम बुद्ध के जीवन को चरितार्थ करने तथा अपने जीवन को कृतार्थ करने के निमित्त हजारों स्तूपों शिलालेखों व धम्म स्तम्भों का निर्माण कराया। सम्राट अशोक के इस धार्मिक परिवर्तन से खुश होकर देश की जनता ने उन सभी स्मारकों को सजाया संवारा तथा उस पर दीपोत्सव किया। यह आयोजन हर्षोलास के साथ १० दिनों तक चलता रहा, दसवें दिन महाराजा ने राजपरिवार के साथ पूज्य भंते मोग्गिलिपुत्त तिष्य से धम्म दीक्षा ग्रहण की। धम्म दीक्षा के उपरांत महाराजा ने प्रतिज्ञा की, कि आज के बाद मैं शास्त्रों से नहीं बल्कि शांति और अहिंसा से प्राणी मात्र के दिलों पर विजय प्राप्त करूँगा। इसीलि...
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•पिता की सख्ती को बर्दाशत करो, ताकी काबिल बन सको, •पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े, •पिता के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान तुमको नीचा कर देगा, •पिता का सम्मान करो, ताकी तुम्हारी संतान तुम्हारा सम्मान करे, •पिता की इज्जत करो, ताकी इससे फायदा उठा सको, •पिता का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको, •पिता के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे आगे करे, •पिता एक किताब है जिसपर अनुभव लिखा जाता है, •पिता के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे दुनिया से गिरा देगा, पिता एक ऐसी हस्ती है ...!!!! माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है ! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे ? जो गरमी हो या सर्दी अपने बच्चों की रोज़ी रोटी की फ़िक्र में परेशान रहता है, ना कोई पिता के जैसा प्यार दे सकता है ना कर सकता है, अपने बच्चों से !! याद रख़े सूरज गरम ज़रूर होता है मगर डूब जाए तो अंधेरा छा जाता है, !! आओ आज़ सब मिलकर उस अज़ीम हस्ती के लिए कामना करते है..| हे भगवान मेरे पिता...
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राम के दरवार में विधवा धोबिन को पेट से पैदा बच्चे की जानकारी के लिए बुलाया गया। पूरा दरबार लगा था। गुरु विश्वामित्र ने औरत से बाप का नाम पूछा। औरत ने प्रतिष्ठित आदमी होने के कारण बताने से इनकार कर दिया तो गुरु ने उस औरत को फांसी की सजा सुनाई और उसकी आखिरी इच्छा जाननी चाही। औरत ने कहा आप मेरे बच्चे के पिता का नाम पूछ रहे हैं, पहले आप अपने पिता का नाम बता दें। (क्योंकि विश्वामित्र को कमल से पैदा बताया गया है)। गुरु के पिता का नाम पूछते ही राम तुरंत झल्ला कर बोले- गुरु की इतनी बेइज्जती करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई ? तो औरत ने राम से पिता का नाम पूछ लिया, (इन चारों के पिता ऋषि बताये जाते हैं, वैसे इनकी माताओं ने खीर खाई थी श्रृंग ऋषि की गुफा में)। तो लक्ष्मण तुरंत बोले -तूने बड़े भाई का अपमान किया। तुझे जिंदा नहीं छोड़ूगा। औरत ने इनसे भी बाप का नाम पूछ लिया। इसके बाद सीता बोली तूने मेरे देवरजी का अपमान किया। इसकी जबान काट लो, औरत ने सीता से भी बाप का नाम पूछा (जो घड़े से पैदा हुई है)। सीता का अपमान सुनकर तुरंत हनुमान बोल पड़े,...