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Showing posts from January, 2020
The English is better for us
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क्या आप जानते हैं कि:- सन 1819 से पहले किसी शूद्र की शादी होती थी तो ब्राह्मण उसका शुद्धीकरण करके 3 दिन अपने पास रखते थे उसके उपरांत उसको घर भेजते थे इस प्रथा को अंग्रेजों ने 1819 ईस्वी में बंद करवाया ✍✍ ✍✍देवदासी प्रथा अंग्रेजों ने ही बंद कराई इस प्रथा में यह होता था कि शूद्र समाज की लडकिया मंदिरों में देवदासी के रूप में रहती थी और उनसे जो बच्चा पैदा होता था उसे हरिजन कहते थे इसीलिए हरिजन एक गाली है ✍✍ ✍✍ चरक पूजा अंग्रेजों ने 1863 ईस्वी में बंद कराई इसमें यह होता था कि कोई पुल या भवन बनने पर शूद्रों की बलि दी जाती थी ✍✍ ✍✍ नरबलि जोकि शूद्रों की दी जाती थी अंग्रेजों ने इसे रोकने के लिए 1830 में कानून बनाया था ✍✍ ✍✍ सन 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी अंग्रेजों ने कहा था कि इनका चरित्र न्यायिक नहीं होता है ✍✍ ✍✍ शूद्रों (दलित पिछड़े) को अंग्रेजों ने 1835 ईस्वी में कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया था इससे पहले शूद्र कुर्सी पर नहीं बैठ सकते थे ✍✍ ✍✍ शासन व्यवस्था पर ब्राह्मणों का 100 परसेंट कब्जा था अंग्रेजों ने इन्हें ...
RSS ka asli Roop
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🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍 *🚩RSS गद्दार व आतंकवादी संगठन है🚩* 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 *Racial Secret Service* *( RSS )* *प्रजातीय रहस्यमय क्रम-व्यवस्था* 🐍 RSS का असली नाम रेसियल सीक्रेट सर्विस है | राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं | 🐍 RSS की स्थापना इजराइली यहुदी मूल के चितपावन ब्राह्मणों नी की है | 🐍 RSS में ज्यादातर सरसंघचालक चितपावन ब्राह्मण ही होते आए हैं | रिसर्च के अनुसार इन ब्राह्मणों का DNA 99.90% बेने इज़राइली यहूदियों से मिलता है | 🐍 RSS आज भी अमेरिका की आतंकवादी लीस्ट में शामिल है | 🐍 RSS ने अपने कार्यालय पर तिरंगा झंडा लहराना 52 वर्षो के बाद शुरु किया है, इसका असली नाम रेसियल सीक्रेट सर्विस था | 🐍 RSS का आज़ादी के आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है । 🐍 RSS ने देश जब 15 अगस्त को आजाद हुआ तब इसने स्वाधीनता दिवस मनाने से इंकार किया था और 1947 से लेकर 2002 तक नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा कभी नहीं फहराया। 🐍...
भारत की नागरिकता शूद्रों को नहीं।
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बाल गंगाधर तिलक ने अपने द्वारा लिखित सन्1895 के "सविधान " में और उनके पत्रिका -केसरी और मराठा पत्रिका के लेख में।लिखा हैं।। कि"" शुद्र वर्ण (पिछड़ा वर्ग ) को और अछूतों को " भारत की नागरिक्ता " नही दी जा सकती ।क्योकि वर्ण व्यवस्था ( वर्णाश्रम धर्म) के अनुसार शुद्र वर्ण का एकमात्र कर्तव्य उच्च तीनो वर्ण (ब्राह्मण, छत्रिय,वैश्य) की सेवा करना हैं। और धर्म शास्त्रो के अनुसार किसी भी "अधिकारों" को धारण करने अधिकारी नही हैं।। 2 ) महात्मा गांधी ने अपनी पुस्तक " भारत का वर्णाश्रम धर्म और जाती व्यवस्था" (सन् 1925) में साफ साफ लिख कर रखा हैं कि " शुद्र वर्ण (पिछड़ा वर्ग) और हरिजनों को "भारत की नागरिक्ता" की मांग भी नही करनी चाहिए क्योकि इससे "वर्णाश्रम धर्म" नस्ट हो जायेगा।" 3, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दूसरे सरसंघ संचालक -गुरु गोलवरकर अपनी पुस्तक "बंच ऑफ़ थॉट्स" में यह लिखते हैं कि " शुद्र वर्ण को " देश की नागरिक्ता" किसी भी हालात में ...