हरिजन शब्द कहने पर अब होगी जेल ,सुप्रीम कोर्ट ने भी हरिजन शब्द को अपराधिक माना

 केंद्र व केरल राज्य की सरकार भी अलग अलग अध्यादेश द्वारा लगा चुकी है   हरिजन शब्द के प्रयोग पर रोक

हरिजन शब्द के प्रयोग पर संशोधित अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम व भारतीय दंड संहिता की धाराओं में दर्ज हो सकता है केस व जाना पड़ सकता है जेल

हरिजन शब्द का प्रयोग करने वाले लोगों व सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कराएंगे आपराधिक केस दर्ज  -: रजत कल्सन

हिसार/26 अक्टूबर

महात्मा गांधी द्वारा भारत के अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय के लोगों के लिए उपयोग किए गए शब्द हरिजन का प्रयोग करना अब महंगा पड़ सकता है ।नेशनल एलाइंस फॉर दलित हुमन राइट्स के संयोजक व दलित राइटस एक्टिविस्ट ,अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि महात्मा गांधी द्वारा देश के अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लिए इज़ाद किए गए शब्द हरिजन का शुरू से ही विरोध रहा है उन्होंने कहा कि भारत का अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय शुरू से ही इस शब्द को अपने लिए अपमानजनक मानता आ रहा है तथा इस पर रोक लगाने के लिए आजादी के बाद से ही आवाज उठनी शुरू हो गई थी। एडवोकेट कल्सन ने बताया कि भारत कि राष्ट्रपति ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के पत्र दिनांक 22-11-12 व क्रमांक 17020/64/2010 / SCD (RL CELL) के मार्फत सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को सर्कुलर जारी कर हरिजन शब्द के सरकारी कामकाज में इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने के आदेश दिए हुए हैं। इसी के साथ सन 2008 में केरल सरकार भी हरिजन शब्द के इस्तेमाल पर पूर्णतया रोक लगा चुकी है ।एडवोकेट कलसन ने बताया कि अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मोहर भी लग गई है । सुप्रीम कोर्ट ने एक ताजा मामले क्रिमिनल अपील नम्बर  570/17  में मंजू सिंह बनाम ओंकार सिंह आहलूवालिया में  दिनांक 24 मार्च 2017 को आरोपी ओंकार सिंह आहलूवालिया द्वारा हरिजन शब्द के इस्तेमाल पर दर्ज हुए मुकदमे में हाई कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार की धारा 18 में अग्रिम जमानत पर प्रतिषेध के बावजूद जमानत दिए जाने के आदेश को खारिज करते हुए हरिजन शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी टिप्पणी की तथा बैंच ने कहा कि इस बात का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हरिजन शब्द का इस्तेमाल उच्च जाति के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति के लोगों को नीचा दिखाने व अपमानित करने के लिए किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हरिजन शब्द का प्रयोग अपमानजनक के साथ साथ आपराधिक भी है इसलिए इस तरह के मामलों में अपराधी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हरिजन शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर एक जाति विशेष को नीचा दिखाने व अपमानित करने के लिए किया जा रहा है । सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश का नागरिक होने के नाते हमें एक बात अपने दिल और दिमाग में रखनी चाहिए कि हम देश के किसी भी नागरिक को इस तरह की भाषा का प्रयोग कर नीचा दिखाना या अपमानित नहीं कर सकते अगर ऐसा करते हैं तो यह आपराधिक होगा।
एडवोकेट रजत कल्सन ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि इन दिनों पुलिस व  सरकारी अधिकारियों द्वारा सरकारी कामकाज में भारत सरकार के उपरोक्त निर्देश व सुप्रीम कोर्ट की उपरोक्त जजमेंट के बावजूद हरिजन शब्द का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है तथा सरकारी अधिकारी तथा लोग जानबूझकर सरकारी आदेशों व कोर्ट के आदेशों की आपराधिक अवहेलना कर रहे हैं ।उन्होंने कहा कि यदि उनके संज्ञान में इस तरह का कोई मामला आता है कि सरकारी या पुलिस विभाग का कोई कर्मचारी या अधिकारी अपने सरकारी कामकाज में हरिजन शब्द का प्रयोग कर रहा है तो वह उसके खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने का काम करेंगे ।एडवोकेट रजत कल्सन ने कहा कि इस शब्द का इस्तेमाल करने पर उसके खिलाफ एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) (आर)( एस) (यू) वे आईपीसी की धारा 295 A व 505 के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है तथा इसमें जेल भी जाना पड़ सकता है तथा अपराध साबित होने पर आरोपी को कम से कम 5 साल तक की सजा भी हो सकती है। उन्होंने दलित समाज को संदेश दिया कि यदि उनके मामले में इस तरह का कोई मामला संज्ञान में आता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का काम करें ताकि इस तरह के शब्द के प्रयोग करने वालों पर लगाम लगाई जा सके।
जारीकर्ता
एडवोकेट रजत कल्सन
9896303010

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